
कोरबा – छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोक पर्व छेरछेरा एवं शाकंभरी जयंती के पावन अवसर पर ग्राम पंचायत बोईदा के सरपंच संजय राज ने जिलेवासियों सहित समस्त ग्रामवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने इन पर्वों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कृषि परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया।सरपंच संजय राज ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि छेरछेरा पर्व नई फसल के घर आने की खुशी का प्रतीक है। यह पर्व किसानों के परिश्रम, त्याग और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता भाव को दर्शाता है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, खुशहाली, वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति और प्रगति लेकर आए तथा ग्राम और जिले का सर्वांगीण विकास हो।उन्होंने कहा कि छेरछेरा पर्व को फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें धान दान की परंपरा समाज में आपसी सहयोग, दानशीलता और समानता का संदेश देती है। इस दिन लोग घर-घर जाकर छेरछेरा मांगते हैं और नए धान का दान कर समाज में प्रेम, सौहार्द और सद्भाव को मजबूत करते हैं। यह परंपरा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।शाकंभरी जयंती पर दी विशेष शुभकामनाएं शाकंभरी जयंती के अवसर पर सरपंच संजय राज ने कहा कि मां शाकंभरी देवी अन्न, कृषि और प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी आराधना से समाज में अन्न समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और जीवन में संतुलन का संदेश मिलता है। शाकंभरी जयंती हमें प्रकृति के संरक्षण, अन्न का सम्मान और समाज के प्रति सेवा भाव की प्रेरणा देती है।उन्होंने कहा कि छेरछेरा पर्व और शाकंभरी जयंती दोनों ही कृषि संस्कृति और अन्न महत्ता से जुड़े पर्व हैं, जो हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की सीख देते हैं।सरपंच संजय राज ने जिले एवं ग्राम पंचायत बोईदा के सभी नागरिकों की दीर्घायु, सुख-शांति और समृद्ध भविष्य की कामना करते हुए कहा कि छेरछेरा पर्व और शाकंभरी जयंती सभी के जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार करें।







